क्या एक और सर्जिकल होना चाहिए ?
आज जम्मू कश्मीर का जो हालात हैं उसे देखकर ऐसा लग रहा कि पाकिस्तान के नापाक इरादे आज भी वैसे ही हैं जैसे कांग्रेस के समय में था। मोदी सरकार के आने के बाद लोगों को लगा कि अब स्थिति सुधर जायेगी लेकिन ऐसे नहीं हुआ। जम्मू कश्मीर में लगातार हो रहे हमले का जवाब देने के लिये मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक भी किया लेकिन उसके बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ । लगतार हो रहें घाटी में हमले का जवाब सेना करारा दे रही हैं लेकिन कश्मीर के कुछ गद्दारो के वजह से कुछ आतंकवादी भारत में दखिल हो जाते हैं । अभी जल्द ही सेना के जवानो को आतंकीयो ने निशाना बनाया। जिसमे 6 जवानो की मौत हुई। अब जरूरत है कि देश में इस माहौल से ऊपर उठकर सभी पार्टियां एक साथ मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़े सर्जिकल स्ट्राइक का मांग करें। जिससे पाकिस्तान को यह सबक दिया जा सके कि यदि तुम हमारे सैनिक मारोगे तो हम तुम्हे छोड़ेंगे नहीं ।
भारत में राजनीति की वजह से हम अपने सैनिकों को लगातार मौत के घाट उतार रहे हैं । सैनिकों की जीवन की कीमत मात्र एक आतंकवादी हमले का है एक आतंकवादी हमले में कई लोग की जान जाती है। जिसमें देश के सैनिक अपमानित भी होते हैं और उनका परिवार भी तबाह हो जाता है । क्या यह सही हैं कि सैनिकों को नियम में बाध कर उनको पूरी छूटना न देकर उनको मौत के घाट उतारा जाए। लगातार जम्मू कश्मीर में हो रहे आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है इसमें कोई दो राय नहीं हैं। तो हम इससे डरते क्यों हैं इसके खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए । वरना इसी तरह हमारे सैनिक मारे जाते रहेंगे। प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी जी ने कहा था कि पाकिस्तान हमारे सैनिक को मरता हैं और हम उसको "लव लेटर" लिखते हैं । जब हम सरकार में आयेंगे तो पाकिस्तान को जवाब गोली से देंगे। यदि तुम लोग हमारे एक जवान को मारते हैं तो हम उनके 200 जवान को मारेंगे । लेकिन यह होता नहीं दिख रहा है । ऐसा होना चाहिए और देश में एक बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक करके आतंकियों को खत्म कर देना चाहिए ।
जो भारत की तरफ नापाक इरादे रखते हो। हमें अब पाकिस्तान से बात करना नहीं चाहिए ना ही हमें अमेरिका के पास जाकर के पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करना चाहिए । भारत खुद पहले पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करें और उससे सारे वार्ता को बंद करें जो भी समझौते हो उसे कर देना चाहिए । क्योंकि सैनिकों की जान की कीमत अब हम पैसों से नहीं लगा सकते । एक सैनिक की मृत्यु पर उसके पीछे पूरा परिवार तबाह होता है । मात्र 30 से 40 हजार रुपए में देश की सेवा कर रहे है लोगों को एक ही समय में कभी भी मौत के घाट उतार दिया जाता है और उन्हें 10 से 15 लाख ₹ दे दिया जाता है । क्या यह देश के सैनिकों का सम्मान है । उनके परिवार भूखों मरने के कगार पर आ जाते हैं । आप देखेंगे कि जवानो में कोई बड़े घर का लड़का नहीं होता होगा। सारे या तो मध्यम वर्ग के हैं या तो गरीब परिवार के क्योंकि उन्हें सेना में जाने से पहले पैसों की जरूरत होती है जो पैसे के लिए सेना की नौकरी करते हैं। वरना इस स्थिति में कोई सेना की नौकरी नहीं करना चाहता । क्योंकि यहां पर नियम कानून ऐसे हैं जो अपने हिसाब से कोई काम नहीं कर पाता । उनके ऊपर कोई हमला करता है तभी उन्हें उस हमलावर को रोकने के लिए कोई आदेश नहीं होता है। क्या इसको बदलना नहीं चाहिए ? ऐसे नियम को बदल कर खत्म करना चाहिए और देश के जवानों को फिर से एक नई ताकत देना चाहिए जिसे देश में आतंकी गतिविधियां रोकी जा सके। वरना इसी तरह हजारों लाखों सैनिकों की जान चली जाएगी फिर भी हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रह जाएंगे।


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