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इंसानों के अधिकारों की लड़ाई- मानवाधिकार


दुनियाभर में हर साल 10 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। हर इंसान को अपनी जिंदगी,आजादी,बराबरी और सम्मान का अधिकार मानवाधिकार कहलाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ चार्टर की धारा 68 के तहत 1946 में एलोनोर रूजवेल्ट की अध्यक्षता में एक मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया था इस आयोग का विश्वव्यापी घोषणा जून 1948 में की । संयुक्त राष्ट्र द्वारा पहली बार वर्ष 1948 में हर साल 10 दिसंबर को इसे मनाये जाने की घोषणा की गई । भारत में 12 अक्टूबर 1993 को भारत सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया। मानवता के खिलाफ जुल्मों को रोकने में उसके खिलाफ संघर्ष को नहीं ताकत देने में इस दिवस की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसका हर साल अलग-अलग थीम होता है इस बार का थीम है "हर कोई दूसरों के अधिकार के लिए खड़ा हो" आज दुनिया भर में जो 2.1करोड़ लोग से जबरदस्ती मजदूरी कराई जा रही है इस में बाल मजदूरों सहित 1.4 करोड़ महिलाएं और 95 लाख पुरुष शामिल है। इसमेंअपना भारत भी काफी प्रभावित है। आयोग के कार्यक्षेत्र में नागरिक और राजनीतिक के साथ-साथ    आर्थिक,सामाजिक, सांस्कृतिक अधिकार भी आते हैं। जैसे बाल मजदूरी, एचआईवी,एड्स,स्वास्थ्य,भोजन,बाल विवाह,महिला अधिकार,हिरासत और मुठभेड़ में होने वाली मौत अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाती और जनजाति के अधिकार आते हैं । आज मानवाधिकार का हनन रोकने के लिए हम सब को प्रयास करना चाहिए।
अजीत कुमार चौधरी

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