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बसपा ने जनता को मुर्ख बनाया !


बहुजन समाज पार्टी से अतीत में अनेक वरिष्ठ नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया है, मगर हाल तक नंबर 2 की हैसियत रखने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी की बर्खास्तगी और फिर उनके द्वारा मायावती पर किए गए पलटवार से पार्टी के अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गए हैं । नसीमुद्दीन सिद्दीकी पार्टी में करीब तीन दशक से थे और विगत दो दशक से उनकी गिनती पार्टी सुप्रीमो मायावती के बेहद करीबी लोगों में होती रही है । यहां तक कि चुनाव में पार्टी का टिकट बांटे जाने से लेकर वित्तीय लेन-देन तक में उनकी अहम भूमिका होती थी पिछले कुछ वर्षों में पार्टी से बाहर निकाले गए या बाहर चले गए नेताओं की तुलना में नसीमुद्दीन इनको एक अहमियत यह भी थी कि वह बहुजन समाजवादी पार्टी का मुस्लिम चेहरा भी थे । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा को मिली करारी हार के बाद नसीमुद्दीन को मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था मगर वह वहां नहीं गए इसे पार्टी के अनुशासनहीनता माना है इसके अलावा उन पर बूचड़खाने चलाने और पार्टी कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों से धन लेने के आरोप भी लगाए गए । हैरानी की बात नहीं है कि बसपा छोड़ कर जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य की तरह नसीमुद्दीन ने भी मायावती पर टिकट के एवज में धन लेने के आरोप लगाए हैं । बसपा का वित्तीय ढांचा जिस तरह का है उसमें वित्तीय लेन-देन हमेशा सवालों के घेरे में रहा है। बेशक यह  इस तरह की अकेली पार्टी नहीं है । बसपा की स्थिति की एक वजह यह भी है कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र का घनागोर आभाव है । उसमें वास्तव में दूसरी पंक्ति जैसे कुछ भी नहीं लिहाजा पार्टी की राजनीतिक गतिविधियां और वित्तीय व्यवस्था मायावती और उनके विश्वस्त सहयोगियो के आपसी विश्वास से ही चलती है । नसीमुद्दीन के खिलाफ की गई कार्यवाही के पीछे एक बड़ी वजह भी हो सकती है कि विधानसभा चुनाव में 98 मुस्लिम उम्मीदवार उतार कर की गई गलती को दुरुस्त करना चाहती हो ।

क्योंकि उसमें उन्हें कोई लाभ नहीं हुआ था, उल्टे उस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का ठप्पा और लग गया। वास्तविकता यह है कि यह पार्टी काशीराम की उस परिकल्पना से लगातार दूर होती जा रही है जिसमें उन्होंने व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने की बात कही थी ।


"बसपा का वित्तीय ढांचा जिस तरह का है उसमें वित्तीय लेन-देन हमेशा सवालों के घेरे में रहा है बेशक वह इस तरह की अकेली पार्टी नहीं है बसपा की स्थिति की एक वजह यह भी है कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र का गाना घोर अभाव है।"
इस लेख कस source हिंदुस्तान हैं। आप यह पोस्ट शेयर के धन्यवाद !! अजीत कुमार चौधरी लेखक

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